शिविर में मिले 8 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों के नाम सरकारी सूची से गायब, ग्रामीणों में भारी रोष
कागजों में संचारी अभियान दावों की खुली पोल,गांव में फैला डेंगू-मलेरिया
भगवान दास की खास रिपोर्ट
बदायूं। जगत ब्लॉक क्षेत्र के गांव बीबीपुर में इन दिनों डेंगू और मलेरिया ने पैर पसार लिए हैं, स्वास्थ्य विभाग की इंतजामी की बजह से पूरा गांव दहशत में है। गांव के 60 से अधिक परिवारों के लोग इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आकर बुखार से तप रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक से 31 जुलाई तक पूरे एक महीने चलाए गए संचारी अभियान के ठीक बाद गांव में यह महामारी फैली है, जिसने विभागीय दावों और अभियान की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि जगत के सीएचसी प्रभारी डॉक्टर मोहम्मद असलम ने गांव में घर- घर जाकर जायजा लिया है।
एलाइजा जांच में 25 डेंगू और 8 मलेरिया पीड़ितों की पुष्टि
गांव में पिछले कई दिनों से लोग तेज बुखार से पीड़ित हैं। निजी व अन्य स्तर पर हुई एलाइजा जांच में अब तक 25 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, अन्य जांचों में आठ लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमण की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई घरों में पूरा का पूरा परिवार बिस्तर पर पड़ा है। जयदेव की पत्नी कन्यावती को आठ दिन पहले बुखार आया था, जिनकी जांच इस्लामगंज की निजी पैथोलॉजी में कराने पर डेंगू पॉजिटिव आया। उनके इलाज में अब तक साढ़े छह हजार रुपये खर्च हो चुके हैं और अब उनके घर में सुनीता (32) और वंदना (12) भी गंभीर रूप से बीमार हैं। वहीं, बहू नन्हीं इस्लामगंज के अस्पताल में भर्ती है।
अधिकारियों के सामने खुली पोल, आंकड़ों की बाजीगरी से गुमराह कर रहा विभाग सीएमओ डॉ विकास कुमार, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ तहसील, जिला मलेरिया अधिकारी अमित कुमार तिवारी और एपिडेयोलॉजिस्ट डॉ कौशल गुप्ता ने बीबीपुर पहुंचकर गांव का भ्रमण किया। अधिकारियों के निर्देश पर गांव के पंचायत भवन में एक स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। शिविर में तैनात सीएचओ अमित कुमार के अनुसार, कुल 48 मरीज जांच के लिए आए थे, जिनमें से प्रेमपाल (50), राममूर्ति (69), अनुराग (8), शेर सिंह (37), गुड्डी (35), निशा (25), प्रकाश (46) और सुनीता (35) सहित आठ लोगों में मलेरिया पॉजिटिव पाया गया। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के निचले कर्मचारियों ने जिला स्तरीय अधिकारियों और डीएम अवनीश राय को गुमराह करने के लिए आंकड़ों में भारी बाजीगरी कर दी। विभाग की ओर से उच्चाधिकारियों को भेजी गई आधिकारिक रिपोर्ट में केवल 40 मरीजों की जांच दिखाई गई और रिपोर्ट में दावा कर दिया गया कि मलेरिया का एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं मिला। इस बाजीगरी से उन आठ संक्रमित मरीजों के नाम सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर दिए गए, जिन्हें मौके पर डॉक्टरों ने पॉजिटिव पाया था।
खानापूर्ति कर दोपहर में ही लौट गई टीम, भटकते रहे मरीज
ग्रामीणों का आरोप है कि पांच दिन से संक्रमण से घिरे गांव में जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, तो वह केवल औपचारिकताएं पूरी करने आई थी। शिविर में पहुंचे मेवाराम और ज्योति ने बताया कि वे पिछले 10-12 दिनों से तेज बुखार से पीड़ित हैं और गांव के डॉक्टरों से दवा लेने पर कोई फायदा नहीं हुआ। जब वे जांच के लिए पंचायत भवन पहुंचे, तो पता चला कि टीम शाम तीन बजे से पहले ही बोरिया-बिस्तर समेटकर रफूचक्कर हो चुकी थी। यही स्थिति सोहन और मीना की भी रही, जो चार-पांच दिनों से बुखार में तपने के बावजूद बिना जांच और दवा के वापस लौट गए।
जलभराव और गंदगी बनी बीमारी की वजह, ग्रामीण निजी डाक्टरों पर निर्भर
ग्रामीण सुमित, अनुराग, सौरभ और आकाश ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गांव की गलियों और नालियों में लंबे समय से गंदगी का अंबार लगा है। जगह-जगह जलभराव होने के कारण मच्छरों का भारी प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीण सौदान सिंह ने बताया कि बारिश के बाद जमा हुए पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। गांव में टीम आते ही प्रधान गायब हो गए। जबकि ग्रामीणों द्वारा कई बार सफाई की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सुधांशु ने बताया कि महामारी फैलने के बाद भी गांव में एंटी-लार्वा या मच्छररोधी दवा का छिड़काव सही तरीके से नहीं कराया गया। सरकारी तंत्र की इस बेरुखी के कारण गरीब ग्रामीण महंगे दामों पर निजी पैथोलॉजी और बरेली व बदायूं के प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलीय सर्विलांस अधिकारी अखिलेश्वर सिंह और एंटोमोलॉजिस्ट अभिषेक ने भी गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है।















