होमगार्डों की ड्यूटी में भेदभाव क्यों ?

बदायूँ – कुछ होमगार्ड हाथ में डंडा लेकर सड़कों, चौराहों और गलियों में दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं। उनकी ड्यूटी का स्थान लगभग हर सप्ताह या दो-तीन दिन में बदल दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर कुछ होमगार्ड ऐसे भी हैं जो वर्षों से उच्च अधिकारियों के आवासों या कार्यालयों पर ही तैनात हैं।
जब अधिकांश होमगार्डों का ड्यूटी चार्ट लगातार बदलता रहता है, तो फिर कुछ विशेष होमगार्ड वर्षों से एक ही स्थान पर कैसे बने हुए हैं?
क्या सड़कों और चौराहों पर ड्यूटी करने वाले होमगार्डों तथा अधिकारियों के यहाँ वर्षों से तैनात होमगार्डों के लिए अलग-अलग नियम हैं?
या फिर ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और अंदरखाने कोई विशेष व्यवस्था काम कर रही है?
यदि सभी होमगार्ड समान हैं, तो ड्यूटी आवंटन भी निष्पक्ष, पारदर्शी और समान अवसर के आधार पर होना चाहिए। संबंधित विभाग को इस विषय पर स्पष्ट नीति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के भेदभाव की आशंका समाप्त हो सके।
सवाल व्यवस्था से है, किसी व्यक्ति विशेष से नहीं।
यदि ड्यूटी का नियम सबके लिए एक है, तो उसका पालन भी सबके लिए समान होना चाहिए।
पारदर्शिता ही निष्पक्षता की पहचान है। होमगार्ड विभाग से अपेक्षा है कि ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट, न्यायसंगत और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित हो, ताकि सभी जवानों का मनोबल बना रहे।

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