आशा कर्मियों की हड़ताल का 39 वा दिन पूरा हो गया । किंतु अभी तक सरकार ने रुकी हुई वार्ता को आगे बढ़ाकर उनकी मांगो को पूरा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

सुनील कश्यप

बदायूं मालवीय आवास मैदान में धरने में जुटी आशा कर्मियों ने अपने खून से मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के फैसले को आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ( ऐक्टू) प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही के आग्रह पर अमल नहीं किया गया।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि सरकार ने 20 वर्षों में आशा कर्मियों की खून की एक एक बूंद निचोड़ लिया है, बचा कुछ खून भी एकमुश्त प्रदेश की सत्ता में बैठे बहरे लोगों को देना चाहते थे,किंतु ऐक्टू के प्रदेश अध्यक्ष और हम सबके संरक्षक के आग्रह पर हमने अपना इरादा बदल दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार की संवेदन हीनता का यह जीता जागता उदाहरण है कि कड़कड़ाती सर्दी में बदायूं सहित प्रदेश की 1 लाख से अधिक आशा कर्मी खुले आसमान के नीचे बैठी रही ,सीएचसी से मुख्यालय और मंडल से होते हुए राजधानी तक सड़क पर जूझती रही किंतु सरकार सिर्फ अपना चेहरा बचाती रही और उसकी नौकरशाही झूठ बोलने तथा उत्पीड़न में लगी रही।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आगामी 2 फरवरी को अपना बजट प्रस्तुत करने जा रही है। इसलिए दिल्ली में बैठी सरकार को 45/ 46 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों राज्य के साथ लागू करने के लिए बाध्य करने हेतु आगामी 30 जनवरी को गांधी भगत सिंह अम्बेडकर के रास्ते, आशा कर्मियों के बेहतर जीवन के वास्ते नारे के साथ मुख्यालयों पर प्रदर्शन और एक बार फिर 9 फरवरी को लखनऊ कूंच किया जाएगा।जौली ने अंत में कहा कि अबकी राजधानी से खाली हाथ लौटने के लिए नहीं ,मांगे पूरी न होने तक डेरा डालकर बैठने की दृढ़ता के साथ जाना होगा।
धरने को संबोधित करते हुए जिला सचिव मुनीषा ने कहा कि 30 तारीख को भारी संख्या में सभी को आना है और 9 फरवरी राजधानी में घेरा डालो आंदोलन की तैयारी में हम सभी को अभी से जुटना होगा।
मुन्नी , विनय , सुनीति , अलका , मीना , राजेश्वरी , गिरिजा , सुमनलता , आदि ने भी अपने विचार रखे।

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