32 संस्कार संपन्न, लोकमंगल और पर्यावरण शुद्धि के लिए कीं आहुतियां
बदायूं। गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ में लोकमंगल और पर्यावरण संशोधन की कामना के साथ गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुतियां समर्पित की गई।
कार्यक्रम में 12 यज्ञोपवीत संस्कार, 20 दीक्षा संस्कार और 1 पुंसवन संस्कार संपन्न कराए गए। इसके बाद मां गायत्री की भव्य आरती हुई और कन्याभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्रनाथ शर्मा ने कहा कि गुरु व्यक्ति नहीं बल्कि एक शक्ति है। गुरु का जीवन भर का तप शिष्य के उत्थान के लिए होता है। गुरु की शक्ति ही शिष्य के चिंतन, चरित्र और आचरण को पवित्र करती है।
यज्ञ का संचालन शक्तिपीठ के परिव्राजक सुमित कुकरेती, लेखराज जायसवाल, शिवंवदा सिंह और पूनम अरोरा ने वेदमंत्रोच्चारण के साथ किया। परिव्राजक बेचेलाल ने युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा और मां गायत्री का पूजन कराया।
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर विश्व शांति और पर्यावरण रक्षा की प्रार्थना की। मातृ-शक्तियों और देवकन्याओं ने आरती की। भोजन व्यवस्था का दायित्व राम कुमार सिंह फौजी ने संभाला।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक नरेंद्र पाल शर्मा, माया सक्सेना, कालीचरण पटेल, डॉ. सोहनपाल, सुरेंद्र पाल, भुवनेश शर्मा, अमिता माहेश्वरी, सुजाता माथुर, सीमा गुप्ता, ममता, वीरेंद्र रस्तोगी, नीलम, संजीव कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।



